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  • Collective effort and awareness are essential for the eradication of child labour: Ashok Vishwakarma

बाल श्रम उन्मूलन हेतु सामूहिक प्रयास और जागरुकता जरूरी:अशोक विश्वकर्मा

ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर बाल श्रम को गंभीर सामाजिक अपराध और बुराई बताते हुए कहा है कि बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराई के उन्मूलन हेतु जागरूकता और सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किताबों वाले, बचपन को बोझ उठाने वाला' होने से बचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

हर बच्चा स्कूल जाए, सपने सजाए तथा राष्ट्रनिर्माण में अपनी सजग भूमिका निभाए, इसके लिए हम सबको मिलकर वंचित परिवारों को जागरूक करना होगा। उन्होंने कहा बाल श्रम गरीबी और मजबूरी का प्रतीक है। बालकों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें शिक्षा स्वास्थ्य और विकास के अवसर प्रदान करना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। बाल श्रम गरीबी अशिक्षा बेरोजगारी सामाजिक असमानता और जागरूकता की कमी से उत्पन्न होता है। बाल श्रम बच्चों की मानसिक, शारीरिक,सामाजिक और नैतिक स्थिति को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने कहा 5 से 17 वर्ष की उम्र के बच्चे जब श्रम के कार्यों में संलग्न होते हैं, तो उनकी शिक्षा स्वास्थ्य और विकास बाधित होता है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में एक करोड़ से अधिक बाल मजदूर थे, जिनकी आयु 5 से 14 वर्ष थी जो चिंताजनक स्थिति पैदा करती है। बाल मजदूरी अधिकांशतः असंगठित क्षेत्र, घरेलू काम, कृषि, मोरंग, बालू ढुलाई और दुकानों में कराए जाते हैं। बाल श्रम निषेध अधिनियम 1986 के तहत यह अपराध है, तथा 14 वर्ष का आयु के बच्चों के लिए खतरनाक उद्योगों में काम करने पर प्रतिबंध है।