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  • A 'double game' of corruption in Baragaon Panchayat! Funds withdrawn again in the name of dilapidated roads.

बड़ागांव पंचायत में भ्रष्टाचार का ‘डबल खेल’! जर्जर सड़क के नाम पर फिर निकली गई राशि

सरपंच और कथित दलालों की सांठगांठ सक्रिय, शासकीय राशि का खुला दुरुपयोग — पानी की बूंद-बूंद को तरस रही जनता! 

रीवा। जनपद पंचायत रायपुर कर्चुलियान अंतर्गत ग्राम पंचायत बड़ागांव एक बार फिर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। आरोप है कि सरपंच भारत कोरी द्वारा पूर्व में निर्मित गुणवत्ता विहीन सड़क, जो कुछ ही महीनों में जर्जर हो गई थी, उसी के नाम पर बची हुई राशि को दोबारा निकाला गया है—लेकिन न तो सड़क की मरम्मत हुई और न ही धन का सही उपयोग। पहले भी बनी थी विवादित सड़क, जांच में मिली थी गड़बड़ी 

ग्रामीणों के अनुसार, सिलचट टोला में बनाई गई सड़क पहले ही भ्रष्टाचार का उदाहरण बन चुकी थी। सड़क निर्माण के कुछ ही समय बाद उसकी हालत खराब हो गई थी। इस पर तत्कालीन जनपद सीईओ संजय सिंह ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया था और सड़क को गुणवत्ता विहीन करार दिया था। उन्होंने पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए थे। जांच रिपोर्ट जिला पंचायत सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर को सौंपी गई, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर लगातार अनियमितताएं और शासकीय राशि का दुरुपयोग हुआ है। फिर निकली राशि, लेकिन काम शून्य  जानकारी के मुताबिक, करीब 28 दिन पहले उसी सड़क के नाम पर बची हुई राशि फिर से निकाल ली गई। लेकिन हैरानी की बात यह है कि न तो सड़क की मरम्मत कराई गई और न ही कहीं कार्य होता दिख रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह पैसा कथित दलालों और चाटुकारों के बीच बांट दिया गया है।

हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला  बताया जा रहा है कि सरपंच भारत कोरी और सचिव प्रवीण सिंह ने मामले में कानूनी बचाव के लिए हाईकोर्ट का रुख किया है, जिससे पूरे प्रकरण ने और गंभीर रूप ले लिया है। जल संकट पर भी ‘खेल’ जारी 

(1) बड़ागांव पंचायत में पानी की समस्या वर्षों पुरानी है, लेकिन समाधान के नाम पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं।

(2) जल जीवन मिशन सहित विभिन्न योजनाओं के तहत राशि खर्च होने के बावजूद गांव के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।

(3) पीएचई विभाग द्वारा बनाई गई पानी की टंकी में पानी तो पहुंचता है, लेकिन पाइपलाइन के जरिए घरों तक नहीं पहुंच पा रहा है।

(4) यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर इस सिस्टम में खामी कहां है?

समरसेबल पंप भी बने ‘घोटाले’ का जरिया 

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत द्वारा खरीदे गए समरसेबल पंपों का उपयोग आम जनता के बजाय सरपंच के करीबी लोगों के निजी हित में किया जा रहा है। सिलचट टोला जैसे इलाकों में हालात यह हैं कि गर्मी शुरू होते ही कुएं सूख जाते हैं और लोगों को 2–3 किलोमीटर दूर साइकिल से पानी लाना पड़ता है।

प्रशासन पर भी उठे सवाल 

ग्रामीणों ने प्रभारी जनपद पंचायत रायपुर कर्चुलियान सीईओ प्राची चतुर्वेदी से मांग की है कि वे केवल औपचारिक निरीक्षण तक सीमित न रहें, बल्कि बड़ागांव पंचायत में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहराई से जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करें।

बड़ागांव पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर बार-बार सामने आ रहे भ्रष्टाचार के आरोप न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं, बल्कि आम जनता के बुनियादी अधिकार—सड़क और पानी—को भी प्रभावित कर रहे हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पूरे मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और क्या वास्तव में दोषियों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।