दीवान की आरंभता अमृत वेले से नितनेम के पाठ , सुखमनी साहिब जी के पाठ के साथ हुई एवं हजूरी रागी भाई हरविंदर सिंह जी ने आशा दीवार के कीर्तन किये।और हैड ग्रंथि ज्ञानी परमजीत सिंह जी ने संगतो को गुरु अंगद देव जी महाराज के इतिहास के बारे में बताया। कि धन धन साहिब श्री गुरु नानक देव साहिब जी महाराज जी की दूसरी ज्योति के रूप में ब्रह्मांड को प्रकाशित करने वाले, सिखो को ""गुरुमुखी लिपि"" प्रदान करने वाले, गुरु शिष्य परम्परा में स्वयं को समर्पित कर, उस परंपरा को पुनर्जीवित करने वाले, गुरु नानक देव जी महाराज जी का इतिहास संकलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले, सेवा,विनम्रता एवम त्याग की प्रतिमूर्ति,
दूसरे गुरु महाराज जी, साहिब श्री गुरु अंगद देव साहिब जी महाराज है। और हजूरी रागी भाई हरविंदर सिंह जी ने शब्द कीर्तन किया वही सम्पूरन सिंह बग्गा जी ने यह भी बताया की हजूरी रागी भाई हरविंदर सिंह जी शब्द कीर्तन करते हुए शाम के दीवान की समाप्ति रात्री 9 बजे करेंगे
अध्यक्ष सरदार सम्पूरन सिंह बग्गा एवं महासचिव चरणजीत सिंह एवं सचिव गगनदीप सिंह बग्गा एवं कोषाध्यक्ष अमरजीत सिंह (पम्मी),परमजीत चन्दर,वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुरिंदर बग्गा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष इक़बाल सिंह ने संगतो को गुरु अंगद देव जी महाराज के प्रकाश पर्व पर गुरु महाराज को नमन किया।
शाम के दीवान की समाप्ति उपरांत गुरु का लंगर अटूट वितरित किया जायेगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरु अंगद देव जी महाराज के प्रकाश पर्व को बहुत ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया।