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  • The message of the times is that only the organized will rule: Ashok Vishwakarma

समय का संदेश है, जो संगठित है वहीं शासन करेगा: अशोक विश्वकर्मा

ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने कहा है कि देश की आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा ओबीसी समुदाय का हैं। चुनाव के समय सभी पार्टियों को इनका वोट चाहिए,रैलियों में भीड़ चाहिए,झंडा उठाने वाले कार्यकर्ता चाहिए,नारे लगाने वाले समर्थक चाहिए,लेकिन जब संगठन में फैसले लेने की बारी आती है,टिकट बांटने की बारी आती है,महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति की बारी आती है,तब तस्वीर  बदल जाती है! सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों...? क्योंकि 90% लोग आज भी छोटी-छोटीजातियों,उपजातियों, और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं में बंटे हुए हैं। 

परिणाम यह है कि जो संगठित हैं,वे निर्णय लेते हैं और जो बिखरे हैं,वे केवल ताली बजाते हैं! राजनीति का सबसे बड़ा नियम है जो संगठित होगा,वही शासन करेगा। आज भी कई जगहों पर OBC, समाज चुनाव जिताने की ताकत रखता है,लेकिन संगठन चलाने की ताकत नहीं रखता भीड़ उसकी,वोट उसका,संघर्ष उसका,लेकिन निर्णय किसी और का चुनावी मंचों पर उसके नाम की चर्चा होती है,लेकिन सत्ता के गलियारों में उसकी हिस्सेदारी पर बहस छिड़ जाती है और वह अपने अधिकारों से वंचित हो जाता है। उन्होंने कहा यह लड़ाई किसी जाति के खिलाफ नहीं,बल्कि अधिकार,प्रतिनिधित्व और भागीदारी की है। लोकतंत्र का अर्थ केवल वोट डालना नहीं, बल्कि नीति निर्माण,संगठन संचालन और संस्थागत भागीदारी में समान और उचित प्रतिनिधित्व भी है। जब तक समाज अपने बुनियादी सवालों शिक्षा,रोजगार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व,सामाजिक न्याय और आर्थिक अवसरों पर एकजुट होकर आवाज़ नहीं उठाएगा,तब तक संख्या बल केवल आंकड़ा बना रहेगा,शक्ति नहीं बन सकता है। याद रखिए जो समाज अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होता, उसके अधिकारों का फैसला दूसरे करते हैं!

जो समाज अपने वोट की ताकत समझता है लेकिन अपनी एकता की ताकत नहीं समझता,वह बार-बार इस्तेमाल तो होता है,लेकिन सशक्त नहीं बन पाता है। समय का संदेश साफ है, शिक्षित बनो,संगठित बनो,संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक बनो और लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करो क्योंकि लोकतंत्र में केवल जनसंख्या नहीं,बल्कि संगठन, जागरूकता और राजनीतिक भागीदारी ही असली ताकत होती है! 90% जब तक बिखरा रहेगा तब तक 10% संगठित होकर प्रभावशाली बना रहेगा। लेकिन जिस दिन 90% अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और संगठित हो जाएगा,उस दिन राजनीति की दिशा और दशा दोनों बदल सकती हैं।