वाराणसी, 30 मई। चंबल मीडिया की बुनियाद पहल के तहत आयोजित कार्यक्रम “तपते भट्ठे, बदलता मौसम: जमीनी कहानियाँ और जलवायु संवाद” में ईंट भट्ठा मजदूरों और प्रभावित समुदायों के अनुभवों को प्रमुखता से उठाया गया। कार्यक्रम में पत्रकारों, जलवायु विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और समुदाय प्रतिनिधियों ने श्रम, पलायन, स्वास्थ्य, जेंडर, जाति तथा जलवायु परिवर्तन के संबंधों पर चर्चा की।
फिल्म स्क्रीनिंग और राउंडटेबल संवाद के माध्यम से प्रतिभागियों ने जलवायु संकट से जुड़ी जमीनी चुनौतियों को साझा किया। वक्ताओं ने जोर दिया कि जलवायु परिवर्तन को केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि आजीविका, सामाजिक न्याय और समानता से जुड़े मुद्दे के रूप में भी देखा जाना चाहिए। कार्यक्रम में प्रभावित समुदायों की आवाज़ों को नीति और सार्वजनिक विमर्श में अधिक स्थान देने की आवश्यकता पर बल दिया गया।