खुदकु*शी से पहले छात्रा ने अपने कुछ साथियों को एक वॉयस रिकार्डिंग भी भेजी थी। दरअसल, 92 फीसदी अंक कम नहीं होते पर वैशाली सिंह को 95 फीसदी अंक की चाहत थी। चाहत अधूरी रह गई तो उसने गुरुवार शाम फंदे से लटककर जान दे दी।
पनकी रतनपुर शिवालिक भवन निवासी छात्रा वैशाली सिंह बुधवार को सीबीएसई 10वीं कक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद से मायूस थी। फंदा लगाने से पहले छात्रा ने अपने कुछ साथियों को मोबाइल पर वॉयस रिकॉर्डिंग भेजी थी। इसमें उसने जीने की इच्छा खत्म होने व उस पर खर्च किए जाने वाले रुपये बर्बाद होने की आशंका का जिक्र किया था।
पुलिस ने जांच के लिए छात्रा का मोबाइल फोन जब्त कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वैशाली अर्मापुर स्थित केंद्रीय विद्यालय में सीबीएसई बोर्ड से 10वीं की छात्रा थी। परिवार में मां काजल, 19 वर्षीय भाई प्रिंस है। प्राइवेट कर्मी पिता वीरेंद्र सिंह की दो साल पहले मौत हो चुकी है। काजल पीरोड स्थित एक मॉल में काम करती हैं। प्रिंस कुछ साल पहले पढ़ाई छोड़ चुका है। काजल ने बताया कि गुरुवार को वह मॉल गई थीं।
दोपहर तीन बजे से शाम पांच बजे तक बेटी को कई कॉल की लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। उन्होंने प्रिंस को कमरे में भेजा तो वह वैशाली का शव फंदे पर लटका देख चीख पड़ा। सूचना पर पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और जांच पड़ताल की। पनकी इंस्पेक्टर मनोज सिंह भदौरिया ने बताया कि तनाव के कारण छात्रा के खुदकु*शी की बात सामने आई है। मोबाइल कब्जे में लेकर जांच की जा रही है। तहरीर मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
खुदकु*शी से पहले छात्रा ने अपने कुछ साथियों को एक वॉयस रिकार्डिंग भेजी थी। इसमें छात्रा कह रही थी कि मेरे से अब जिया नहीं जाएगा... मैं एक जिंदा लाश बनकर रह गई हूं... अब मुझे जीने की इच्छा नहीं है। मुझे बहुत डर लगता है... मां मुझ पर इतना पैसा खर्च कर रही हैं... कहीं उनका पैसा बर्बाद न हो जाए।
मृतका की मां काजल ने आरोप लगाया कि बेटी पर स्कूल वाले पढ़ाई का काफी दबाव डाल रहे थे। इस कारण वह रात-रात भर पढ़ती रहती थी। इसी के तनाव में उसने अपनी जिंदगी खत्म कर ली। छात्रा के भाई प्रिंस का कहना था कि वह भी केंद्रीय विद्यालय में 11वीं का छात्र रहा है। शरारती होने के कारण उसके नंबर अच्छे नहीं आते थे। 11 अक्तूबर 2024 को पिता के देहांत के बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी।