- 30 साल तक घुटनों के दर्द से जूझते रहे 78 वर्षीय श्री हरिश्चंद्र नारंग, रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट ने लौटाई चलने-फिरने की आज़ादी गिरने से टूटी पैर की हड्डी, डॉक्टर सौरव शुक्ला ने दिखाई नई राह
लखनऊ 6 जून, 2026: 78 वर्षीय हरिश्चंद्र नारंग पिछले लगभग 30 वर्षों से घुटनों के दर्द से परेशान थे। बढ़ती उम्र के साथ यह समस्या लगातार गंभीर होती गई और पिछले दो वर्षों में स्थिति इतनी खराब हो गई कि उनका सामान्य रूप से चलना-फिरना भी मुश्किल हो गया। दर्द और कमजोरी के कारण एक दिन चलते समय वह गिर गए, जिससे उनके बांए पैर की घुटने के नीचे की हड्डी टूट गई। इसके बाद वह लगभग पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हो गए और दैनिक कार्यों के लिए भी सहारे की आवश्यकता पड़ने लगी।
इलाज की तलाश में हरिश्चंद्र नारंग ने मेदांता अस्पताल में जॉइंट रिप्लेसमेंट एवं ऑर्थोपेडिक्स विशेषज्ञ डॉ. सौरव शुक्ला से संपर्क किया। जांच के बाद डॉ. शुक्ला ने उन्हें नी रिप्लेसमेंट की सलाह दी। शुरुआत में मरीज और परिवार के मन में सर्जरी को लेकर आशंकाएं थीं, लेकिन गहराई से हुई बातचीत और आधुनिक तकनीक की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने सर्जरी कराने का फ़ैसला लिया।
मेदांता अस्पताल में डॉ. सौरव शुक्ला की यह एक हज़ारवीं सर्जरी थी। सर्जरी प्रक्रिया के बारे में डॉ. शुक्ला ने बताया कि रोबोटिक तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सर्जरी बेहद सटीक तरीके से की जा सकती है। इससे मरीज के घुटने या हिप की बनावट के अनुसार योजना बनाई जाती है, जिससे जोड़ बेहतर तरीके से काम करता है और मरीज जल्दी अपने सामान्य जीवन में लौट पाता है। आज कई मरीज सर्जरी के कुछ ही समय बाद पहले की तुलना में अधिक आत्मविश्वास के साथ चल-फिर रहे हैं। हमारा लक्ष्य केवल दर्द खत्म करना नहीं, बल्कि मरीज को उसकी पुरानी सक्रिय जिंदगी वापस दिलाना है।
उन्होंने बताया कि रोबोटिक तकनीक की मदद से सफल नी रिप्लेसमेंट के बाद मरीजों की स्थिति में अप्रत्याशित सुधार देखने को मिलता है। वह भविष्य में बिना किसी सहारे के चल-फिर सकते हैं और सामान्य जीवन जी सकते हैं। मरीज जिस काम को कभी नामुमकिन मानते हैं, वह सर्जरी के बाद आसानी से कर पाते हैं।
ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी में 27 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले डॉ. सौरव शुक्ला अब तक 11,000 से अधिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी कर चुके हैं। मेदांता अस्पताल से जुड़ने के बाद भी वह 1,200 से अधिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी कर चुके हैं, जिनमें लगभग 750 रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट शामिल हैं। उन्हें रोबोटिक और कन्वेंशनल दोनों प्रकार की टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी में महारत हासिल है।