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  • Question on Bihar AEDO exam: Contract awarded to blacklisted company, SciEducare employees involved in scam.

बिहार AEDO परीक्षा पर सवाल: ब्लैकलिस्टेड कंपनी को ठेका, साईएजुकेयर के कर्मचारी घोटाले में शामिल |

पटना: बिहार में सहायक शिक्षा विकास अधिकारी (AEDO) परीक्षा विवादों में घिर गई है। 935 पदों के लिए आयोजित इस परीक्षा में लगभग 11 लाख अभ्यर्थी 746 केंद्रों पर शामिल हो रहे हैं, लेकिन परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

विवाद की जड़ में बायोमेट्रिक सत्यापन का ठेका ‘साईएजुकेयर (SaiEducare)’ को दिया जाना है। यह वही कंपनी है, जिसे पहले राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है। इसके अलावा, बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) भी इस कंपनी को पूर्व में कारण बताओ नोटिस जारी कर चुका है, क्योंकि इसने एक परीक्षा में लगभग 13,000 अभ्यर्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं किया था।

मामला तब तूल पकड़ गया जब मुंगेर के एक परीक्षा केंद्र पर साईएजुकेयर के कर्मचारी अनियमितताओं में पकड़े गए। जानकारी के अनुसार,

दो बायोमेट्रिक ऑपरेटर मोबाइल फोन लेकर परीक्षा केंद्र में प्रवेश करते पाए गए, जो नियमों के विरुद्ध है

घटना के बाद पुलिस ने केंद्र प्रभारी, कंपनी के कर्मचारियों और दो अभ्यर्थियों को गिरफ्तार कर लिया

प्रारंभिक पूछताछ में गड़बड़ी के लिए प्रलोभन दिए जाने की बात सामने आई है

सूत्रों के मुताबिक, पुलिस साईएजुकेयर के मालिक रमेश शर्मा की भी तलाश कर रही है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

इस घटना के बाद पूरे परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एक केंद्र पर ऐसी घटना हो सकती है, तो अन्य केंद्रों पर भी अनियमितताओं की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

अब प्रमुख सवाल यह है कि ब्लैकलिस्टेड कंपनी को इतना महत्वपूर्ण ठेका किस आधार पर दिया गया और क्या इस पूरे मामले में किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई है।

इस बीच, अभ्यर्थियों और अभिभावकों में चिंता का माहौल है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि परीक्षा की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनी रहे।