आर.एस. बनारस लॉ कॉलेज का तीसरा दीक्षांत समारोह सम्पन्न

122 छात्र-छात्राओं को प्रदान की गईं विधि की उपाधियां, न्याय और संविधान की रक्षा का दिलाया संकल्प

वाराणसी, सुंदरपुर स्थित आर.एस. बनारस लॉ कॉलेज का तीसरा दीक्षांत समारोह शनिवार को गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। समारोह में विधि शिक्षा पूर्ण करने वाले 122 छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान की गईं। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ समारोह की अध्यक्षता करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के पंजीयन एवं स्टांप शुल्क राज्य मंत्री तथा कॉलेज के संरक्षक रवीन्द्र जायसवाल ने कहा कि विधि के विद्यार्थी देश की लोकतांत्रिक एवं न्यायिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। उनकी भूमिका केवल विवादों के समाधान तक सीमित नहीं है, बल्कि संवैधानिक मूल्यों की रक्षा सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विधि शिक्षा का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों तक न्याय की पहुंच बढ़ाना होना चाहिए उन्होंने विद्यार्थियों से न्यायिक व्यवस्था की शुचिता बनाए रखने तथा अपने पेशे के साथ कभी समझौता नहीं करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विधि के विद्यार्थियों के कंधों पर निष्पक्ष एवं प्रभावी न्याय व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है। विद्यार्थियों को राष्ट्र के प्रहरी के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए मुख्य अतिथि भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधि आयोग की सचिव डॉ. अंजू राठी राणा ने कहा कि कानून की शिक्षा केवल उपाधि प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में समानता, न्याय और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में न्यायपालिका और अधिवक्ता के अलावा कॉरपोरेट कानून, साइबर कानून, बौद्धिक संपदा अधिकार, वैकल्पिक विवाद समाधान और विधिक शोध जैसे क्षेत्रों में भी विद्यार्थियों के लिए व्यापक संभावनाएं हैं उन्होंने विद्यार्थियों से बदलते विधिक परिदृश्य के अनुरूप तकनीक और नए कानूनों की जानकारी से स्वयं को लगातार अपडेट रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यही एक विधि विशेषज्ञ का नैतिक एवं सामाजिक उत्तरदायित्व भी है समारोह में आभार व्यक्त करते हुए कॉलेज की प्राचार्या विपाशा गोस्वामी ने कहा कि एक कुशल विधि विशेषज्ञ के लिए कानून का ज्ञान जितना आवश्यक है, उतना ही संवेदनशीलता, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा भी जरूरी है। इस अवसर पर संस्था की प्रबंधक अंजू जायसवाल, डॉ. नलिनी मिश्रा, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. सी.पी. उपाध्याय सहित विधि क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ शिक्षाविद्, न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, कॉलेज के प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।