युवाओं में बढ़ रहा न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का खतरा, समय पर जांच और इलाज जरूरी: मेदांता न्यूरो कॉन्क्लेव 2026 में विशेषज्ञ
*लखनऊ, 9 अगस्त, 2026:* न्यूरोलॉजिकल बीमारियां यानी दिमाग और नसों से जुड़ी बीमारियां भारत के सामने बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अब कम उम्र के लोगों में भी स्ट्रोक और दिमाग से जुड़ी दूसरी बीमारियां देखने को मिल रही हैं। लंबे समय तक बैठे रहना, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और मोटापा इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) स्टडी के अनुसार, न्यूरोलॉजिकल बीमारियां आज दुनियाभर में खराब स्वास्थ्य और विकलांगता का सबसे बड़ा कारण हैं। इन बीमारियों से 340 करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। भारत में हर साल करीब 18 से 20 लाख नए स्ट्रोक के मामले सामने आते हैं। वहीं, 25 साल से अधिक उम्र के करीब हर 4 में से 1 व्यक्ति को जीवन में कभी न कभी स्ट्रोक होने का खतरा रहता है विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में भी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, तंबाकू का सेवन और विशेषज्ञ इलाज तक देर से पहुंचना इसके प्रमुख कारण हैं। स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में करीब हर 4 में से 1 वयस्क को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है। यह स्ट्रोक के सबसे बड़े कारणों में से एक है। विशेषज्ञों ने बताया कि करीब 80% स्ट्रोक को जीवनशैली में बदलाव, नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर इलाज से रोका जा सकता है
इन्हीं चिंताओं पर मेदांता लखनऊ की ओर से आयोजित मेदांता न्यूरो कॉन्क्लेव 2026 में विस्तार से चर्चा हुई। इसमें देशभर के प्रमुख न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन और न्यूरो क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने स्ट्रोक के इलाज, मिर्गी, मूवमेंट डिसऑर्डर, न्यूरो ऑन्कोलॉजी, दिमाग और रीढ़ की कम चीरा लगाने वाली सर्जरी, न्यूरो इमेजिंग और मरीजों की रिकवरी से जुड़े इलाज में हुई नई प्रगति पर चर्चा की कॉन्क्लेव का नेतृत्व डॉ. अनूप कुमार ठक्कर, डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी; डॉ. रतीश जुयाल, डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी; डॉ. रवि शंकर, डायरेक्टर, न्यूरोसर्जरी; डॉ. कमलेश सिंह भैसोरा, डायरेक्टर, न्यूरोसर्जरी; और डॉ. रोहित अग्रवाल, डायरेक्टर, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी ने किया। इनके साथ देशभर से आए अन्य विशेषज्ञों ने जटिल न्यूरोलॉजिकल बीमारियों, आधुनिक न्यूरो इमेजिंग, स्ट्रोक के इलाज, दिमाग और नसों से जुड़ी बीमारियों, मिर्गी, मूवमेंट डिसऑर्डर और आधुनिक सर्जरी तकनीकों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए वैज्ञानिक कार्यक्रम में इलाज के वैज्ञानिक आधार पर व्याख्यान, पैनल चर्चा और जटिल मरीजों के मामलों पर चर्चा हुई। इसके जरिए डॉक्टरों को न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में आ रही नई तकनीकों और इलाज के बेहतर तरीकों पर अपने अनुभव साझा करने का मौका मिला डॉ. राकेश कपूर, मेडिकल डायरेक्टर और डायरेक्टर, यूरोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी, मेदांता लखनऊ ने कहा, "न्यूरोलॉजिकल बीमारियां हर उम्र के लोगों में तेजी से आम हो रही हैं और आने वाले वर्षों में इनका बोझ और बढ़ने की उम्मीद है। न्यूरो कॉन्क्लेव का उद्देश्य देशभर के विशेषज्ञों को एक साथ लाना, जटिल मरीजों के मामलों पर चर्चा करना और यह सुनिश्चित करना कि मरीजों को न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में हुई नई प्रगति का लाभ मिले। बेहतर इलाज के लिए समय पर बीमारी की पहचान, विशेषज्ञ देखभाल और समय पर इलाज सबसे प्रभावी तरीके हैं वैज्ञानिक सत्रों के दौरान विशेषज्ञों ने स्ट्रोक के इलाज, कम चीरा लगाकर दिमाग और रीढ़ की सर्जरी, मिर्गी के इलाज, गंभीर मरीजों की न्यूरो केयर, न्यूरो इमेजिंग, दिमाग की कार्यप्रणाली से जुड़ी सर्जरी और मरीजों की रिकवरी से जुड़े इलाज में तेजी से हो रही प्रगति पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने जटिल न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के बेहतर इलाज के लिए वैज्ञानिक आधार वाले इलाज के तरीकों और अलग-अलग विशेषज्ञों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर जोर दिया कॉन्क्लेव में स्ट्रोक के मरीजों के लिए इमरजेंसी इलाज की व्यवस्था को मजबूत करने, आधुनिक इमेजिंग तकनीकों की मदद से बीमारी की जल्द पहचान करने और न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन, गंभीर मरीजों की देखभाल करने वाले डॉक्टरों, रेडियोलॉजिस्ट और मरीजों की रिकवरी से जुड़े विशेषज्ञों के बीच बेहतर तालमेल पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य मरीजों को इलाज की पूरी सुविधा एक साथ उपलब्ध कराना है विशेषज्ञों ने लोगों से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को सामान्य स्तर पर रखने, तंबाकू से दूर रहने और शारीरिक रूप से सक्रिय रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि शरीर के एक हिस्से में अचानक कमजोरी, बोलने में परेशानी, तेज सिरदर्द, शरीर का संतुलन बिगड़ना या बेहोशी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों ने कहा कि समय पर बीमारी की पहचान, स्ट्रोक के इलाज वाले विशेषज्ञ केंद्रों तक जल्दी पहुंच और लोगों में जागरूकता बढ़ाने से उत्तर प्रदेश में न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का बोझ काफी कम किया जा सकता है और मरीजों के लंबे समय के स्वास्थ्य परिणाम बेहतर किए जा सकते हैं।