समाज के अन्याय को समझे बिना आचरण पर अंतिम निर्णय उचित नहीं : प्रो. श्रद्धानंद
वाराणसी। प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र ट्रस्ट, लमही की ओर से रविवार को ‘सुनो मैं प्रेमचंद’ कार्यक्रम के 2001वें दिवस पर प्रेमचंद की कहानी ‘पाप का अग्निकुंड’ का पाठ वरिष्ठ कवि जय प्रकाश मिश्र धानापुरी ने किया। कहानी की समीक्षा करते हुए प्रो. श्रद्धानंद ने कहा कि समाज में व्याप्त अन्याय और परिस्थितियों को समझे बिना किसी व्यक्ति के आचरण पर अंतिम निर्णय देना उचित नहीं है
डॉ. राम सुधार सिंह ने कहा कि प्रेमचंद ने कहानी में प्रचलित नैतिक मान्यताओं पर सवाल उठाते हुए व्यक्ति की परिस्थितियों और मानसिक संघर्ष को समझने का संदेश दिया है। कार्यक्रम में साहित्यप्रेमी, शोधार्थी, विद्यार्थी व स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। अतिथियों ने प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। संचालन राजेश श्रीवास्तव ने किया।