स्वतंत्रता दिवस पर भी घर में कैद रहा भूतपूर्व सैनिक

2010 के आदेश के 16 वर्षों बाद भी नहीं खुला आम रास्ता, वर्षों से अतिक्रमण का आरोप 

अविनाश चतुर्वेदी ✍️ 

रीवा/गुढ़। स्वतंत्रता दिवस पर जहां पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा था और जगह-जगह तिरंगा फहराया जा रहा था, वहीं रीवा जिले की गुढ़ तहसील क्षेत्र से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत बदवार के शिपुरवा टोला निवासी भूतपूर्व सैनिक रोशन लाल मिश्रा वर्षों से अपने घर तक पहुंचने वाले आम रास्ते के अवरुद्ध होने की समस्या से परेशान हैं। रास्ता बंद होने के कारण वे स्वतंत्रता दिवस के ध्वजारोहण कार्यक्रम में भी नहीं पहुंच सके भूतपूर्व सैनिक का आरोप है कि उनके घर तक पहुंचने वाला पुराना आम रास्ता राजस्व अभिलेख में दर्ज है, लेकिन कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर रास्ते पर अतिक्रमण कर उसे बाधित कर दिया गया है। उनका कहना है कि इस समस्या के समाधान के लिए वे पिछले कई वर्षों से तहसील, एसडीओ कार्यालय, जिला प्रशासन, थाना और अन्य माध्यमों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन समस्या का स्थायी निराकरण नहीं हो सका 2009 में शिकायत, 2010 में रास्ता खुलवाने का आदेश रोशन लाल मिश्रा के अनुसार सर्वे/खसरा क्रमांक 4592/1 से 4392/3 के मध्य पुराना आम रास्ता दर्ज है। रास्ता अवरुद्ध होने की शिकायत उन्होंने वर्ष 2009 में गुढ़ तहसील में की थी। शिकायत के बाद तहसीलदार द्वारा पटवारी से रिपोर्ट मंगाई गई और वर्ष 2010 में रास्ता खुलवाने के संबंध में आदेश भी पारित किया गया पीड़ित का कहना है कि आदेश जारी होने के बावजूद मौके से कथित अतिक्रमण नहीं हटाया गया। अब करीब 16 वर्ष बीत जाने के बाद भी रास्ते की स्थिति जस की तस बनी हुई है ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि वर्ष 2010 में रास्ता बहाल कराने का आदेश पारित किया गया था, तो उसके अनुपालन में अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई जनसुनवाई से लेकर CM हेल्पलाइन तक शिकायत  रोशन लाल मिश्रा का कहना है कि उन्होंने समस्या के निराकरण के लिए अनुविभागीय अधिकारी गुढ़, कलेक्टर की जनसुनवाई, संबंधित थाना और CM हेल्पलाइन सहित विभिन्न माध्यमों से शिकायतें की हैं। इसके बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली भूतपूर्व सैनिक का कहना है कि एक ओर सरकार आम नागरिकों को उनके अधिकारों और सुविधाओं का लाभ दिलाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर उन्हें अपने ही घर तक पहुंचने के रास्ते के लिए वर्षों से सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं रास्ते में गिरी दीवार और गंदगी का अंबार  पत्रकारों द्वारा मौके पर पहुंचकर स्थिति देखा गया कि रास्ते में कच्ची दीवार गिरी हुई और गंदगी का अंबार दिखाई दे रहा है। पीड़ित के अनुसार बारिश के मौसम में रास्ता बाधित होने के कारण उनके घर में पानी घुस रहा है। आवागमन का रास्ता बंद होने से परिवार को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है उनका कहना है कि यह केवल आने-जाने की समस्या नहीं है, बल्कि राजस्व अभिलेख में दर्ज रास्ते और पूर्व में जारी प्रशासनिक आदेश के क्रियान्वयन से जुड़ा मामला है “देश की सेवा की, अब अपने ही घर तक पहुंचने के लिए संघर्ष”  रोशन लाल मिश्रा ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष देश की सेवा में समर्पित किए। उनके पुत्र भी देशसेवा के जज्बे के साथ कार्यरत हैं। लेकिन आज उन्हें अपने ही घर तक पहुंचने के रास्ते के लिए प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व रिकॉर्ड और वर्ष 2010 में पारित आदेश की जांच कराते हुए मौके से अतिक्रमण हटाया जाए तथा आम रास्ते को तत्काल बहाल कराया जाए आत्मदाह की चेतावनी से मामला और गंभीर  लगातार लंबित समस्या से परेशान रोशन लाल मिश्रा ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्या का गंभीरता से समाधान नहीं किया गया तो वे आत्मदाह जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर हो सकते हैं। उन्होंने इसके लिए संबंधित लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों-कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराने की बात कही है उनकी इस चेतावनी को देखते हुए मामला बेहद गंभीर हो जाता है। प्रशासन को उनकी सुरक्षा और स्थिति को ध्यान में रखते हुए तत्काल उनसे संपर्क कर उचित सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए 16 साल बाद भी आदेश बेअसर, प्रशासन के सामने बड़ा सवाल  यह पूरा मामला प्रशासनिक आदेशों के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। वर्ष 2010 में रास्ता खुलवाने का आदेश जारी हुआ, लेकिन वर्ष 2026 में भी रास्ता बंद है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि आदेश के बाद मौके पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई और यदि कार्रवाई हुई थी तो रास्ता दोबारा कैसे अवरुद्ध हुआ उक्त मामले की जानकारी पत्रकार द्वारा गुढ़ तहसील के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं तहसीलदार के संज्ञान में देने के बाद अधिकारियों द्वारा मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल न्यायोचित कार्रवाई किए जाने का आश्वासन दिया गया है अब देखना होगा कि प्रशासनिक स्तर पर इस मामले में कब तक ठोस कार्रवाई होती है और क्या करीब 16 वर्षों से लंबित आम रास्ते की समस्या का समाधान हो पाता हैसबसे बड़ा सवाल यही है—देश की सेवा करने वाले एक भूतपूर्व सैनिक को अपने ही घर तक पहुंचने के लिए आखिर 16 वर्षों तक संघर्ष क्यों करना पड़ा?