विरासत पदयात्रा के उपरांत विद्यार्थियों ने देखी जनरल कोठी |

लखनऊ रेजीडेंसी जाकर विद्यार्थियों नें परखे एतिहासिक महत्व

लखनऊ। विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर इंटैक लखनऊ चैप्टर एवं भारतीय सर्वेक्षण विभाग, लखनऊ सर्किल के संयुक्त तत्वावधान में लखनऊ रेजिडेंसी परिसर में एक विस्तृत विरासत पदयात्रा (हेरिटेज वॉक) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं आमजन में सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उनके संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना था।

इस अवसर पर एएसआई, लखनऊ सर्किल के अधीक्षण पुरातत्वविद् आफ़ताब हुसैन, उप अधीक्षण पुरातत्वविद् श्री प्रतीक पांडेय, वरिष्ठ विशेषज्ञ ए. के. श्रीवास्तव, डॉ नीतू अग्रवाल (संयोजक, इंटैक लखनऊ चैप्टर), खुन खुन जी गर्ल्स डिग्री कॉलेज से डॉ पारुल सिंह तथा डॉ विजेता दीक्षित सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

विरासत पदयात्रा के दौरान प्रतिभागियों को रेजीडेंसी परिसर के विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों—मुख्य भवन, बेगम कोठी, बैली गार्ड गेट तथा अन्य संरक्षित अवशेषों—का भ्रमण कराया गया। 

इस दौरान ए. के. श्रीवास्तव एवं प्रदीप पांडेय ने विद्यार्थियों को 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में रेजीडेंसी की महत्वपूर्ण भूमिका, ब्रिटिशकालीन स्थापत्य विशेषताओं तथा पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस कार्यक्रम में खुन खुन जी गर्ल्स डिग्री कॉलेज एवं बी के टी इण्टर कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने ऐतिहासिक स्थलों का प्रत्यक्ष अवलोकन कर अपने ज्ञान को और अधिक समृद्ध किया।

विरासत पदयात्रा के उपरांत विद्यार्थियों ने ‘जनरल कोठी’ का भी अवलोकन किया, जहाँ उन्हें उस कालखंड की प्रशासनिक व्यवस्था एवं जीवन शैली से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। इसी क्रम में एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें ऐतिहासिक चित्रों, अभिलेखों एवं संरक्षण संबंधी सामग्री को प्रदर्शित किया गया।

इस प्रदर्शनी का उद्घाटन एन के एस चौहान (सह-संयोजक, इंटैक उत्तर प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी) द्वारा किया गया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं तथा विरासत संरक्षण के प्रति जागरूकता को सुदृढ़ करते हैं।

कार्यक्रम के अंत में सहायक पुरातत्वविद् सौरभ द्वारा सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया तथा भविष्य में भी इस प्रकार के जन-जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन की प्रतिबद्धता दोहराई गई।