भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक में बढ़ रही नाराजगी, कांग्रेस के लिए पुराने मतदाताओं को जोड़ने का अवसर
वाराणसी, उत्तर प्रदेश किसान कांग्रेस के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता एवं उपाध्यक्ष संजय चौबे ने कहा कि बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जेएसपी सुप्रीमो प्रशांत किशोर तथा मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस की जीत ने राष्ट्रीय राजनीति में नए राजनीतिक संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि इन परिणामों ने भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक और बदलते राजनीतिक समीकरणों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। संजय चौबे ने कहा कि बांकीपुर विधानसभा सीट पर करीब तीन दशकों तक भाजपा का वर्चस्व रहा, लेकिन इस बार उपचुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, इस परिणाम के पीछे सामाजिक और राजनीतिक दोनों तरह के कारण रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंडल आयोग और रामजन्मभूमि आंदोलन के दौर के बाद सवर्ण समाज का बड़ा वर्ग भाजपा के साथ जुड़ा था, जिससे पार्टी को लंबे समय तक इस सीट पर सफलता मिलती रही। हालांकि हाल के वर्षों में यूजीसी कानून, नीट पेपर लीक और भरत तिवारी एनकाउंटर जैसे मुद्दों ने सवर्ण समाज के एक वर्ग में नाराजगी पैदा की है। चौबे ने दावा किया कि भरत तिवारी प्रकरण का असर केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विभिन्न समुदायों में असंतोष देखने को मिला। उनका कहना है कि भाजपा के विरोध में मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग इस बार प्रशांत किशोर के पक्ष में गया, जिससे उन्हें जीत मिली। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा के पारंपरिक मतदाता उससे दूर होते हैं तो इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। वहीं कांग्रेस के सामने अपने पुराने मतदाताओं को फिर से जोड़ने का अवसर है, लेकिन इसके लिए बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना होगा। संजय चौबे ने कहा कि लोकतंत्र में चुनावी परिणाम समय-समय पर राजनीतिक संदेश देते हैं और आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि बदलते माहौल का सबसे अधिक लाभ किस राजनीतिक दल को मिलता है। उन्होंने कहा कि छोटी-सी राजनीतिक चूक भी चुनावी समीकरण बदल सकती है।