नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक और समयबद्ध सुधार किए गए हैं। ब्रिटिश काल से विरासत में मिले ‘स्टील फ्रेम’ को अब नियंत्रण के बजाय नागरिक सेवा और जवाबदेही के केंद्र में लाया जा रहा है उन्होंने बताया कि केंद्रीय लोक शिकायत निवारण प्रणाली में शिकायतों के निस्तारण का औसत समय 157 दिन से घटकर 15 दिन रह गया है। शिकायतों की संख्या भी करीब तीन लाख से बढ़कर 27 लाख वार्षिक हो गई है और शिकायत निवारण अधिकारियों की संख्या एक लाख तक पहुंची है। सीपीजीआरएएमएस अब 22 भाषाओं में सेवाएं दे रहा है और इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग किया जा रहा है डॉ. सिंह के अनुसार, मिशन कर्मयोगी के माध्यम से अधिकारियों को नियम-आधारित व्यवस्था से भूमिका और परिणाम आधारित कार्यसंस्कृति की ओर ले जाया गया है। आईजीओटी कर्मयोगी मंच पर 1.65 करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारी प्रशिक्षण ले रहे हैं उन्होंने कहा कि सरकारी भर्तियों में साक्षात्कार समाप्त करने, स्वप्रमाणन व्यवस्था लागू करने, अप्रचलित कानूनों को हटाने और महिला कर्मचारियों के लिए मातृत्व, चाइल्ड केयर तथा अन्य सुविधाओं जैसे कदमों से प्रशासन को अधिक संवेदनशील बनाया गया है डॉ. सिंह ने कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य केवल व्यवस्था में बदलाव करना नहीं, बल्कि ऐसी सरकार तैयार करना है जो शासन करने के बजाय सेवा करे और जनता के प्रति जवाबदेह हो