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भारतीय ज्ञान परम्परा को समकालीन शिक्षा से जोड़ना जरूरी : प्रो. प्रेम नारायण सिंह

वाराणसी। अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र (आईयूसीटीई), वाराणसी द्वारा “भारतीय ज्ञान परम्परा” विषय पर छह दिवसीय ऑनलाइन संकाय विकास कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई ने भारतीय ज्ञान परम्परा को वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में समाहित करने पर जोर देते हुए कहा कि यह परम्परा शिक्षा को समग्र, मूल्यपरक एवं जीवनोपयोगी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई के मंगलाचरण एवं अतिथि परिचय से हुई। प्रो. आशीष श्रीवास्तव, संकायाध्यक्ष (शैक्षणिक एवं शोध), आईयूसीटीई ने स्वागत भाषण एवं विषय की रूपरेखा प्रस्तुत की इसके बाद डॉ. राजा पाठक, आईयूसीटीई, बीएचयू ने भारतीय ज्ञान परम्परा की आधारभूत अवधारणाओं पर व्याख्यान दिया। प्रो. आशीष श्रीवास्तव ने “NEP 2020, शिक्षक शिक्षा एवं पाठ्यचर्या एकीकरण” विषय पर विचार रखे। अंतिम सत्र में डॉ. अवनीश भटनागर, विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, नई दिल्ली ने “भारतीय नैतिक मूल्य एवं समग्र शिक्षा की अवधारणा” पर व्याख्यान दिया कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राजा पाठक, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई द्वारा किया जा रहा है।