वाराणसी,सामाजिक सौहार्द, कानून-व्यवस्था एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था की सुरक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण विषय पर अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी द्वारा महामहिम राष्ट्रपति को प्रेषित जनहित याचिका पर राष्ट्रपति सचिवालय ने संज्ञान लेते हुए उसे आवश्यक कार्रवाई हेतु उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को अग्रेषित कर दिया है। राष्ट्रपति सचिवालय के अवर सचिव अशोक कुमार द्वारा जारी आधिकारिक ई-मेल में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया है कि याचिका पर की गई कार्रवाई की सूचना सीधे याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराई जाए। उल्लेखनीय है कि यह जनहित याचिका वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दृष्टिगत संभावित दुष्प्रचार, फर्जी समाचार, सोशल मीडिया के माध्यम से फैलने वाली अफवाहों तथा संवेदनशील सामाजिक एवं राजनीतिक विषयों पर भ्रामक प्रचार को रोकने के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई थी। याचिका में विशेष रूप से आरक्षण तथा एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल जैसे विषयों का उल्लेख करते हुए आशंका व्यक्त की गई है कि चुनावी वातावरण में इन मुद्दों का दुरुपयोग कर समाज में भ्रम, वैमनस्य एवं तनाव उत्पन्न करने का प्रयास किया जा सकता है। याचिका में कहा गया है कि वर्तमान डिजिटल युग में सोशल मीडिया के माध्यम से गलत सूचनाएँ अत्यंत तीव्र गति से प्रसारित होती हैं। यदि समय रहते प्रभावी निगरानी, तथ्य-जांच तथा जन-जागरूकता की व्यवस्था नहीं की गई, तो सामाजिक सौहार्द, जातीय सद्भाव तथा कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी कारण राज्य सरकार से आग्रह किया गया है कि सोशल मीडिया मॉनिटरिंग व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जाए, फैक्ट-चेक तंत्र को सक्रिय रखा जाए तथा भ्रामक एवं भड़काऊ सामग्री पर त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही विभिन्न विभागों के मध्य समन्वित तंत्र विकसित कर समय रहते आवश्यक कदम उठाने की भी मांग की गई है।
अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा कि यह याचिका किसी राजनीतिक दल या विचारधारा के समर्थन अथवा विरोध के उद्देश्य से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता, सामाजिक शांति, संवैधानिक व्यवस्था तथा राष्ट्रीय हित की रक्षा के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान होना चाहिए, किन्तु झूठी सूचनाओं, दुष्प्रचार और सुनियोजित अफवाहों के माध्यम से समाज में वैमनस्य फैलाने की किसी भी कोशिश को समय रहते रोकना राज्य का दायित्व है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तर प्रदेश सरकार राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा अग्रेषित इस जनहित याचिका पर गंभीरतापूर्वक विचार करेगी तथा भविष्य में चुनावी वातावरण को शांतिपूर्ण, पारदर्शी और तथ्यपरक बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रशासनिक एवं कानूनी कदम उठाएगी। उल्लेखनीय है कि याचिका में अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने अपने पद का उल्लेख वरिष्ठ उपाध्यक्ष, दी बनारस बार एसोसिएशन, वाराणसी तथा संयोजक, भारतीय जनता पार्टी विधि प्रकोष्ठ, काशी क्षेत्र के रूप में किया है।