आदित्यनाथ झा की 115वीं जयंती मनाई गई

वाराणसी। मैथिल समाज, उत्तर प्रदेश एवं संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति पद्मविभूषण डॉ. आदित्यनाथ झा की 115वीं जयंती मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता वैज्ञानिक एवं कुलानुशासक प्रो. जितेन्द्र कुमार ने की। उन्होंने कहा कि डॉ. झा का जीवन ज्ञान, संस्कार, कर्तव्यनिष्ठा और भारतीय ज्ञान-परंपरा के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है। उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए मुख्य वक्ता पूर्व कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने कहा कि डॉ. आदित्यनाथ झा प्रतिभा, प्रशासनिक कुशलता और दूरदृष्टि के अद्वितीय संगम थे। उन्होंने विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति के रूप में संस्कृत को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान से जोड़ने तथा भारतीय ज्ञान-परंपरा को समकालीन आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया विशिष्ट अतिथि प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी एवं सारस्वत अतिथि प्रो. सुधाकर मिश्र ने डॉ. झा के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि ऐसे विद्वान आचार्यों का जीवन नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। छात्रकल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. शैलेश कुमार मिश्र ने भी उनके योगदान को रेखांकित किया कार्यक्रम में मैथिल समाज की ओर से अतिथियों का पारंपरिक अभिनंदन किया गया। मंगलाचरण, दीप प्रज्ज्वलन एवं स्वागत के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। संयोजन एवं संचालन डॉ. कमलेश कुमार झा ने तथा धन्यवाद ज्ञापन गौतम कुमार झा ने किया। इस अवसर पर प्रो. विधु द्विवेदी, प्रो. विजय पाण्डेय, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, प्रो. अमित कुमार शुक्ल, डॉ. विशाखा शुक्ला, डॉ. मधुसूदन मिश्र, निरसन कुमार झा सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।