मिशन शक्ति के दावों के बीच उठ रहे सवाल: महिला शिकायतों की निष्पक्ष जांच और समझौतों की पारदर्शिता जरूरी
स्कूलों से लेकर गांव-गांव तक जागरूकता अभियान, लेकिन थानों में महिला शिकायतों के निस्तारण पर सवाल
मंडल प्रभारी अवनीत कुमार शर्मा
रामपुर। महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलंबन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शासन द्वारा मिशन शक्ति अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत पुलिस विभाग की महिला कर्मियों द्वारा स्कूल-कॉलेजों, गांवों और सार्वजनिक स्थानों पर जाकर महिलाओं एवं छात्राओं को उनके अधिकारों और सुरक्षा संबंधी कानूनों के प्रति जागरूक किया जा रहा है
एक ओर मिशन शक्ति के माध्यम से महिलाओं को अपनी समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ मामलों में महिला शिकायतों की सच्चाई, निष्पक्ष जांच और शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया को लेकर सवाल भी सामने आ रहे हैं
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि कुछ मामलों में शिकायतों की जांच पूरी होने से पहले ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो जाता है। वहीं, जब किसी विवाद को आपसी समझौते के माध्यम से समाप्त कराने का प्रयास किया जाता है, तो कथित रूप से लेन-देन की शिकायतें भी सामने आती हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है महिला थाना और प्रत्येक थाने में पारदर्शिता की जरूरत मिशन शक्ति का मूल उद्देश्य महिलाओं को न्याय और सुरक्षा का भरोसा देना है। ऐसे में महिला संबंधी प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच, दोनों पक्षों की बात सुनना और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई बेहद जरूरी है।
यदि किसी शिकायत में आरोप गलत पाए जाते हैं तो जांच के बाद तथ्य सामने आने चाहिए और यदि आरोप सही हैं तो पीड़िता को कानून के अनुसार न्याय मिलना चाहिए। इसी तरह किसी भी समझौते की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि मिशन शक्ति की मूल भावना पर कोई सवाल न उठे शासन-प्रशासन से उठी मांग
लोगों का कहना है कि मिशन शक्ति को केवल जागरूकता कार्यक्रम तक सीमित न रखकर महिला शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर भी विशेष निगरानी होनी चाहिए। यदि किसी थाने में समझौते के नाम पर अवैध धनराशि मांगने की शिकायत सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जानी चाहिए मिशन शक्ति महिलाओं को न्याय और सुरक्षा देने की मुहिम है। इसकी सफलता तभी मानी जाएगी, जब हर महिला को बिना किसी दबाव, भेदभाव या आर्थिक लेन-देन के निष्पक्ष सुनवाई और न्याय मिल सके।