विभाजन की त्रासदी की निष्पक्ष जांच के लिए राष्ट्रीय आयोग की मांग

विभाजन की त्रासदी की निष्पक्ष जांच के लिए राष्ट्रीय आयोग की मांग

वाराणसी, वर्ष 1947 के भारत-विभाजन की परिस्थितियों, निर्णय-प्रक्रिया, सीमा निर्धारण तथा मानवीय त्रासदी की स्वतंत्र एवं प्रमाण-आधारित जांच की मांग को लेकर अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी वाराणसी श्री सत्येंद्र कुमार को राष्ट्रपति महोदया के नाम ज्ञापन सौंपा प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र सरकार से “राष्ट्रीय विभाजन त्रासदी एवं परिस्थितियाँ जांच आयोग” गठित करने की मांग की। अधिवक्ताओं ने कहा कि आयोग का उद्देश्य किसी समुदाय या व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि उपलब्ध सरकारी अभिलेखों, दस्तावेजों, प्रत्यक्षदर्शी गवाहियों और ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर विभाजन की वास्तविक परिस्थितियों को सामने लाना होना चाहिए।

ज्ञापन में विभाजन से जुड़े दस्तावेजों के डिजिटलीकरण, राष्ट्रीय विभाजन डिजिटल अभिलेखागार तथा पीड़ितों की गवाही सुरक्षित रखने के लिए राष्ट्रीय विभाजन मौखिक इतिहास परियोजना शुरू करने की भी मांग की गई प्रतिनिधिमंडल में शशांक शेखर त्रिपाठी, वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश त्रिवेदी, वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष शुक्ला, जितेंद्र तिवारी, उपेंद्र निगम, आशुतोष सक्सैना, गुलशन मिश्रा, गौरव मिश्रा, मोनी श्रीवास्तव, सुजीत कुमार सिंह, पल्लवी श्रीवास्तव, राही पटेल एवं श्वेता अग्रहरि सहित अन्य अधिवक्ता शामिल रहे शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा कि विभाजन की सच्चाई सामने लाने का उद्देश्य दोषारोपण नहीं, बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों का दस्तावेजीकरण और पीड़ितों की स्मृति को सुरक्षित रखना है।