वियतनाम के बौद्ध भिक्षु पञ्ञाकर ने केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, सारनाथ के जीवक सभागार में सभा को संबोधित करते हुए कहा की उनका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में शांति, अहिंसा, करुणा और सौहार्द्र का संदेश फैलाना है। इसके लिए वह दुनिया भर में यात्रा कर रहे हैं।इस यात्रा में उनके वफादार श्वान साथी आलोका(द पीस मैसेंजर )भी हैं। विदित हो कि भारत (कोलकाता) में भिक्षुओं को यह शांति का प्रतीक आलोका मिला था,जिसे बौद्ध भिक्षु पञ्ञाकारा ने उन्हें अपनाया और उसका नाम 'आलोका' रखा जिसका अर्थ प्रकाश है। शांति यात्राओं में भिक्षुओं के साथ चलने वाला यह श्वान आज दुनिया भर में प्रेम, अटूट निष्ठा और अहिंसा का जीवंत प्रतीक बन चुका है।आलोका ने न केवल भिक्षुओं का साथ दिया बल्कि दुनिया को यह भी सिखाया कि हर प्राणी बेहतर जीवन का हकदार है।
अपने प्रवचन में भिक्षु पञ्ञाकर ने कहा कि प्रेम और करुणा की कोई सीमा नहीं है। उन्होंने जोर देते हैं कहा कि यदि हम दुनिया में शांति चाहते हैं, तो हमें सबसे पहले खुद के भीतर शांति तलाशनी होगी। यदि हम धीमी गति से जिएं और भीतर झांकें, तो हमें वास्तविक शांति अवश्य मिलेगी।शांति केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है। करुणा के साथ जीने के लिए समाज के हर व्यक्ति को इसमें सक्रिय रूप से भाग लेना होगा।उनका मूल मंत्र है: "सभी प्राणी खुश रहें, सभी प्राणी सुरक्षित रहें और शांति प्रत्येक व्यक्ति के भीतर से शुरू हो"।
केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के कुलपति प्रोफेसर वाड्ंछुग दोर्जे नेगी के अभिभाषण में यह संदेश दिया कि विभाजित दुनिया में लोगों के बीच दूरियां बढ़ रही हैं। करुणा हमें उन लोगों के प्रति भी सहिष्णु और समझदार बनाती है जिनसे हमारे विचार नहीं मिलते, जिससे मजबूत सामाजिक संबंध बनते हैं।आज भी दुनिया युद्ध और संघर्ष के साये में जी रही है। दलाई लामा के अनुसार, मानवता के अस्तित्व और शांति के लिए प्रेम और करुणा बुनियादी आवश्यकताएं हैं, कोई विलासिता नहीं। माननीय कुलपति जी के अभिभाषण को श्री दीपांकर ने वाचन किया।
संस्थान की कुलसचिव डॉ. सुनीता चंद्रा ने कहा कि करुणा सिर्फ एक भावना नहीं है, बल्कि यह वह सक्रिय कर्म है जो पीड़ित की पीड़ा को कम करने का प्रयास करता है और दुनिया को बदलने की शक्ति रखता है।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर भोटि एवं पालि भाषा में मंगलाचरण के साथ हुआ।
कार्यक्रम का संचालन प्रलेखन अधिकारी श्री राजेश कुमार मिश्र तथा धन्यवाद उपकुलसचिव डॉ हिमांशु पाण्डेय ने किया।इस कार्यक्रम में संस्थान एवं शहर भर सैकड़ों लोग उपस्थित थे।