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  • Power outage on the Tiwani feeder lasted 5 hours and 37 minutes, Prakash Tiwari raised serious questions about Mangawa's power system.

तिवनी फीडर की 5 घंटे 37 मिनट बिजली गुल,मनगवां की विद्युत व्यवस्था पर प्रकाश तिवारी ने उठाए गंभीर सवाल

150–200 मीटर केबल के रूटीन कार्य के लिए साढ़े पांच घंटे की कटौती पर उठे सवाल,बारिश में बार-बार बिजली गुल होने से उपभोक्ता हो रहे परेशान खबर मध्यप्रदेश के रीवा जिले के मनगवां विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत तिवनी फीडर से है जहा विद्दुत व्यवस्था को लेकर एक बार फिर विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर मनगवां विधानसभा युवा कांग्रेस अध्यक्ष प्रकाश तिवारी ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनहोने कहा कि दोपहर करीब 1 बजे से शाम 6:37 बजे तक, यानी लगभग 5 घंटे 37 मिनट तक तिवनी सहित आसपास के क्षेत्र की बिजली बंद रही। बताया गया कि करीब 150–200 मीटर केबल बिछाने/स्थापित करने का रूटीन कार्य किया जा रहा था। सवाल यह है कि इतने सीमित कार्य के लिए पूरे फीडर अथवा बड़े क्षेत्र के उपभोक्ताओं को घंटों बिजली कटौती की मार क्यों झेलनी पड़ी? 150–200 मीटर केबल के काम के लिए साढ़े पांच घंटे की कटौती क्यों मामले में सबसे बड़ा तकनीकी सवाल Electrical Isolation और Sectionalization को लेकर खड़ा हो रहा है। यदि कार्य किसी निश्चित ट्रांसफॉर्मर, पोल अथवा लाइन सेक्शन तक सीमित था, तो क्या संबंधित हिस्से को अलग कर बाकी क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति जारी रखी जा सकती थी यदि यह तकनीकी रूप से संभव था, तो पूरे फीडर की आपूर्ति करीब साढ़े पांच घंटे बंद रखने की आवश्यकता क्यों पड़ी? और यदि sectionalization संभव नहीं था, तो क्या क्षेत्र की विद्युत संरचना में ऐसी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत नहीं है उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली विभाग को अब केवल कटौती की सूचना देने के बजाय यह भी बताना चाहिए कि किस कार्य के लिए कितने समय की शटडाउन ली गई और क्या वैकल्पिक आपूर्ति की कोई व्यवस्था उपलब्ध थी बारिश की बूंद गिरते ही बिजली गुल होने का आरोप

मनगवां–गंगेव–तिवनी क्षेत्र में विद्युत कटौती को लेकर उपभोक्ताओं की नाराजगी नई नहीं है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बारिश शुरू होते ही बिजली गुल होना जैसे व्यवस्था का हिस्सा बन गया है बार-बार ट्रिपिंग और फॉल्ट के कारण घरेलू उपभोक्ताओं के साथ दुकानदारों तथा छोटे कारोबारियों को भी आर्थिक और व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सवाल यह है कि यदि बारिश के मौसम में हर साल एक जैसी समस्या सामने आती है, तो विभाग द्वारा लाइन, इंसुलेटर, जंपर, ट्रांसफॉर्मर और अन्य संवेदनशील बिंदुओं की प्री-मेंटेनेंस और पेट्रोलिंग कितनी गंभीरता से की जा रही हैदिन में कटौती, रात में फॉल्ट तो उपभोक्ता जाएं कहां स्थानीय उपभोक्ताओं का आरोप है कि दिन में लंबी बिजली कटौती के बाद यदि रात में फॉल्ट हो जाए तो समस्या और बढ़ जाती है। कई बार पर्याप्त तकनीकी स्टाफ उपलब्ध नहीं होने से फॉल्ट सुधारने में देरी होने की शिकायत सामने आती है लोगों का दावा है कि कुछ परिस्थितियों में ऑपरेटरों पर भी अतिरिक्त जिम्मेदारियां आ जाती हैं, जिससे फॉल्ट की सूचना, पेट्रोलिंग और सुधार कार्य प्रभावित होता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में विभागीय अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है AE की कार्यप्रणाली पर भी सवाल क्षेत्र के उपभोक्ताओं में मनगवां के सहायक अभियंता (AE) की कार्यप्रणाली को लेकर भी नाराजगी बताई जा रही है। लोगों का आरोप है कि लगातार ट्रिपिंग, फॉल्ट और अनियमित बिजली कटौती के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान दिखाई नहीं दे रहा है हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना बाकी है। विभाग यदि इन शिकायतों को गलत मानता है तो उसे क्षेत्र में विद्युत व्यवस्था सुधारने के लिए किए गए मेंटेनेंस, फॉल्ट रेट, स्टाफ व्यवस्था और वैकल्पिक सप्लाई से संबंधित तथ्य सार्वजनिक करने चाहिए अब जवाबदेही तय करने का समय तिवनी फीडर की बुधवार की 5 घंटे 37 मिनट की बिजली कटौती ने सिर्फ एक दिन की परेशानी नहीं, बल्कि पूरे मनगवां–गंगेव–तिवनी क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं उपभोक्ताओं का सवाल सीधा है—जब एक सीमित क्षेत्र में काम हो रहा था तो पूरे क्षेत्र को घंटों अंधेरे में क्यों रखा गया बिजली विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या sectionalization, proper isolation, alternate supply और बेहतर fault management की व्यवस्था क्षेत्र में प्रभावी रूप से मौजूद है। यदि नहीं, तो वर्षों से बिजली व्यवस्था झेल रहे उपभोक्ताओं को आखिर कब राहत मिलेगी बारिश में ट्रिपिंग, दिन में घंटों की कटौती और रात में फॉल्ट—इन तीनों के बीच पिस रहे उपभोक्ताओं को अब आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी समाधान और जवाबदेही चाहिए।