विचारपूर्ण श्रद्धांजलि एवं युवा पीढ़ी के लिए प्रेरक संदेश
राष्ट्रीय अध्यक्ष हिंदू देव प्रकाश शुक्ला
राष्ट्रीय युवा वाहिनी एवं राष्ट्रीय युवा वाहिनी नेशनल वालंटियर भाजपा लोकनायक जयप्रकाश नारायण का नाम भारतीय इतिहास में केव ल एक राजनेता या स्वतंत्रता सेनानी के रूप में दर्ज नहीं है। उनका व्यक्तित्व उस विचार का प्रतीक है जिसमें सत्ता से अधिक समाज, पद से अधिक सिद्धांत और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से अधिक राष्ट्रहित को महत्व दिया गया आज जब राजनीति, लोकतंत्र, सामाजिक परिवर्तन और युवा शक्ति पर व्यापक चर्चा होती है, तब जयप्रकाश नारायण का जीवन हमें आत्मचिंतन करने के लिए प्रेरित करता है जेपी का जीवन हमें यह सिखाता है कि व्यक्ति की महानता इस बात से तय नहीं होती कि वह कितने बड़े पद पर पहुंचा, बल्कि इस बात से तय होती है कि उसने अपने जीवन, विचार और संघर्ष से समाज को कितना बेहतर बनाने का प्रयास किया सत्ता पाने वाले बहुत हुए, सत्ता ठुकराने वाले विरले हुए स्वतंत्र भारत के इतिहास में अनेक ऐसे नेता हुए जिन्होंने सत्ता के लिए संघर्ष किया, चुनाव लड़े और बड़े पदों तक पहुंचे। लेकिन जयप्रकाश नारायण का मार्ग अलग था उन्होंने सत्ता को राजनीति का अंतिम लक्ष्य नहीं माना उन्होंने यह साबित किया कि सच्चा नेतृत्व कुर्सी पर बैठने से नहीं, बल्कि समाज के बीच खड़े होने से पैदा होता है स्वतंत्रता के बाद उनके सामने राजनीतिक सत्ता और बड़े पदों के अवसर मौजूद थे, लेकिन उन्होंने अपने जीवन को केवल व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा तक सीमित नहीं किया। उन्होंने समाज परिवर्तन, सर्वोदय और जनसेवा के मार्ग को प्राथमिकता दी आज के राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेपी के जीवन से यह सीखना चाहिए कि यदि सेवा केवल पद मिलने तक सीमित है, तो वह सेवा नहीं, स्वार्थ है सच्चा समाजसेवक वह है जो पद मिले या न मिले, सम्मान मिले या न मिले, सत्ता साथ हो या न हो—फिर भी समाज और राष्ट्र के लिए अपना कार्य करता रहे स्वतंत्रता संग्राम से लेकर सम्पूर्ण क्रांति तक संघर्ष की लंबी यात्रा जयप्रकाश नारायण का जीवन संघर्षों की श्रृंखला था उन्होंने केवल अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष नहीं किया, बल्कि स्वतंत्र भारत में भी व्यवस्था की कमियों, भ्रष्टाचार और लोकतांत्रिक मूल्यों के संकट पर अपनी आवाज उठाई 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में उनकी भूमिका भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के साहसिक अध्यायों में गिनी जाती है। जेल, संघर्ष और भूमिगत आंदोलन के कठिन दौर में उन्होंने यह दिखाया कि राष्ट्र के लिए संघर्ष करने वाला व्यक्ति परिस्थितियों से नहीं डरता आज देशभक्ति की चर्चा करना आसान है। सोशल मीडिया पर राष्ट्रभक्ति के संदेश लिखना आसान है। लेकिन वास्तविक राष्ट्रभक्ति तब दिखाई देती है जब व्यक्ति अपने व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के हित में जिम्मेदारी निभाता है युवा पीढ़ी को यह समझना होगा कि देशभक्ति केवल नारों का विषय नहीं है देशभक्ति का वास्तविक अर्थ है गरीब के लिए संवेदना रखना,भ्रष्टाचार के विरुद्ध खड़ा होना, शिक्षा को बढ़ावा देना,
समाज में भाईचारा बनाए रखना, नशे और अपराध के खिलाफ जागरूकता फैलाना, और अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना सम्पूर्ण क्रांति केवल सत्ता परिवर्तन का नारा नहीं थी जयप्रकाश नारायण द्वारा दिया गया “सम्पूर्ण क्रांति” का संदेश आज भी उ तना ही प्रासंगिक है सम्पूर्ण क्रांति का अर्थ केवल किसी सरकार को हटाकर दूसरी सरकार बनाना नहीं था वास्तविक परिवर्तन तब होगा जब राजनीति में नैतिकता आएगी, शिक्षा में संस्कार आएंगे, समाज में समानता आएगी, प्रशासन में ईमानदारी आएगी, युवाओं में जिम्मेदारी आएगी,और व्यक्ति स्वयं अपने चरित्र को सुधारने का प्रयास करेगा आज हम अक्सर व्यवस्था को दोष देते हैं लेकिन हमें स्वयं से भी एक प्रश्न पूछना चाहिए क्या व्यवस्था केवल नेताओं और अधिकारियों से बनती है नहीं व्यवस्था हम सब से बनती है यदि नागरिक अपने कर्तव्य नहीं निभाएंगे, यदि समाज में लोग भ्रष्टाचार को सामान्य मान लेंगे, यदि युवा नशे और हिंसा के रास्ते पर चले जाएंगे, यदि हम जाति और धर्म के नाम पर एक-दूसरे से नफरत करने लगेंगे—तो केवल सरकार बदलने से समाज नहीं बदलेगा इसीलिए जेपी का विचार आज भी हमें याद दिलाता है “व्यवस्था परिवर्तन से पहले आत्म परिवर्तन आवश्यक है लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष जयप्रकाश नारायण का जीवन लोकतांत्रिक चेतना का भी प्रतीक है उन्होंने यह समझा कि लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने और सरकार बनाने का नाम नहीं है लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ है नागरिकों को अपनी बात कहने का अधिकार,स्वतंत्र विचार रखने की आजादी, सत्ता से प्रश्न पूछने का अधिकार, और देश के भविष्य में जनता की सक्रिय भागीदारी लोकतंत्र में सरकार का सम्मान आवश्यक है, लेकिन लोकतंत्र में जनता का अधिकार भी उतना ही महत्वपूर्ण है सच्चा लोकतंत्र वही है जहां नागरिक जिम्मेदारी के साथ अपने अधिकारों का उपयोग करें और सरकारें भी संविधान एवं लोकतांत्रिक मूल्यों की मर्यादा में कार्य करें जेपी ने अपने जीवन के अंतिम चरण में लोकतंत्र की रक्षा के लिए जिस प्रकार संघर्ष किया, वह आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देता है कि लोकतंत्र केवल संविधान की पुस्तकों से मजबूत नहीं होता, बल्कि जागरूक नागरिकों से मजबूत होता है युवा शक्ति ही राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है जयप्रकाश नारायण ने युवाओं पर विश्वास किया 1974 का आंदोलन इस बात का प्रमाण था कि जब युवा जागते हैं तो समाज में परिवर्तन की एक नई चेतना पैदा हो सकती है लेकिन आज के युवाओं के सामने चुनौती और अवसर दोनों है आज भारत का युवा तकनीक से जुड़ा है,
इंटरनेट से जुड़ा है,
विश्व की जानकारी रखता है,
नई सोच रखता है,
स्टार्टअप और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ रहा