नमामि गंगे योजना : गंगा की स्वच्छता के लिए सामूहिक भागीरथ प्रयास

वाराणसी। गंगा महज एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति की प्राणधारा है। सदियों से मां गंगा देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन को समृद्ध करती आई हैं। वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नमामि गंगे योजना के माध्यम से गंगा को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाने के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैंगंगा प्रदूषण के प्रमुख कारणों में औद्योगिक एवं रासायनिक कचरा, सीवेज, घरेलू अपशिष्ट, कृषि में रासायनिक खाद व कीटनाशकों का प्रयोग तथा अत्यधिक जल दोहन शामिल हैं। नमामि गंगे के तहत औद्योगिक इकाइयों के प्रदूषित जल को गंगा में जाने से रोकने, सीवेज शोधन संयंत्रों को प्रभावी बनाने और बंद संयंत्रों को पुन: संचालित करने पर जोर दिया जा रहा है गंगा के अविरल प्रवाह को बनाए रखने के लिए अनियंत्रित बालू खनन पर रोक, तटवर्ती क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने तथा औषधीय एवं उपयोगी पौधों के रोपण जैसे प्रयास भी जरूरी हैं। इसके साथ ही नगर निकायों, स्वयंसेवी संगठनों और आम जनता को घरेलू एवं हानिकारक कचरे को नदियों और नालों में जाने से रोकने में सक्रिय भूमिका निभानी होगी गंगा की स्वच्छता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। गंगोत्री से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल तक बहने वाली मां गंगा को स्वच्छ एवं अविरल बनाने के लिए सामूहिक भागीरथ प्रयास ही हमारी इस अनमोल धरोहर को सुरक्षित रख सकता है।