बच्चे की धड़कन तक नहीं सुनने दी, अंदर जाने से रोका”—मृत नवजात को लेकर अस्पताल से निकला परिवार, मेडिकल फाइल पुलिस के कब्जे में
*मंडल प्रभारी अवनीत कुमार शर्मा*
रामपुर। शहर कोतवाली क्षेत्र के केके हॉस्पिटल में नवजात बच्चे की मौत ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और इलाज के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नवजात की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही, समय पर ऑक्सीजन न देने और इलाज के दौरान परिवार को बच्चे से दूर रखने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं
परिजनों का कहना है कि बच्चे की हालत लगातार बिगड़ रही थी और परिवार के लोग अस्पताल के कर्मचारियों से बच्चे को देखने तथा उसकी स्थिति बताने की गुहार लगाते रहे, लेकिन उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। आरोप है कि परिवार को बच्चे की धड़कन तक सुनने या उसकी वास्तविक हालत देखने नहीं दी गई बच्चा गंभीर था या इलाज व्यवस्था? उठ रहा बड़ा सवाल रिजनों के मुताबिक, बच्चे को ऑक्सीजन की जरूरत थी, लेकिन आरोप है कि समय पर पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं दी गई। हालत बिगड़ने के दौरान परिवार से इलाज के खर्च और फीस की मांग होती रही। जब खून की जरूरत पड़ी तो परिवार ने खून की व्यवस्था भी की, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद नवजात को बचाया नहीं जा सका बच्चे की मौत के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजन मृत नवजात को लेकर अस्पताल से चले गए। घटना के बाद इलाज से संबंधित डॉक्टर की फाइल और उपचार का पूरा विवरण पुलिस को सौंपे जाने की बात सामने आई है अब सवाल—इलाज में क्या हुआ था मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि नवजात की हालत इतनी गंभीर थी तो उसे समय पर किस प्रकार का उपचार दिया गया? ऑक्सीजन कब और कितनी दी गई? खून कब चढ़ाया गया? डॉक्टर ने बच्चे की हालत को लेकर क्या-क्या दर्ज किया? और सबसे अहम—परिजनों को बच्चे से मिलने से क्यों रोका गया इन सवालों का जवाब मेडिकल रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है क्या समझौते के जरिए मामला शांत कराने की कोशिश सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि घटना के बाद अस्पताल की ओर से परिवार को कथित तौर पर समझाने-बुझाने और मामले को आगे न बढ़ाने की कोशिश की गई। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है अगर ऐसा हुआ है तो सवाल और गंभीर हो जाता है कि क्या नवजात की मौत की जांच से पहले ही मामला दबाने की कोशिश की जा रही है केके हॉस्पिटल पहले भी क्यों रहा चर्चा में स्थानीय लोगों का कहना है कि केके हॉस्पिटल की व्यवस्थाओं को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। कुछ दिन पहले भी अस्पताल का एक मामला चर्चा में आया था। अब नवजात की मौत के बाद एक बार फिर अस्पताल की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है पुलिस के पास पहुंची फाइल, अब जांच की बारी इलाज की फाइल पुलिस के पास पहुंचने के बाद अब जांच एजेंसियों के सामने मेडिकल रिकॉर्ड की पड़ताल करना महत्वपूर्ण होगा। यह देखा जाना चाहिए कि बच्चे को अस्पताल में कब भर्ती किया गया, किस डॉक्टर ने उपचार किया, कौन-कौन सी दवाएं दी गईं, ऑक्सीजन और रक्त की व्यवस्था कब की गई और बच्चे की मौत का चिकित्सकीय कारण क्या था नवजात की मौत कोई मामूली मामला नहीं है। यदि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होना जरूरी है। वहीं यदि अस्पताल की ओर से सभी प्रोटोकॉल का पालन किया गया था, तो वह भी जांच के जरिए साफ होना चाहिए अब देखना यह है कि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच करते हैं या फिर फाइलों के ढेर में नवजात की मौत का सच भी दबकर रह जाता है।