वाराणसी। देश को भविष्य की वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए उत्पादन, सेवा तथा प्रबंधन के प्रत्येक क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले कार्यस्थल प्रबंधन मानकों को अपनाना होगा। तकनीकी एवं प्रबंधन क्षेत्र से जुड़े युवाओं को ‘5एस’ तकनीक में दक्ष बनाना समय की आवश्यकता है, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों तक पहुंचने का प्रभावी माध्यम है। यह विचार काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने व्यक्त किए।
वे गुणवत्ता मंडल मंच भारत (क्यूसीएफआई) द्वारा स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंस परिसर में आयोजित ‘5एस’ राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित कर रहे थे। अधिवेशन में देश के प्रमुख औद्योगिक एवं सार्वजनिक प्रतिष्ठानों के तकनीकी और प्रबंधन क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
क्यूसीएफआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव ने कहा कि भविष्य में वैश्विक बाजार में निर्यात बढ़ाने के लिए उत्पादन प्रक्रियाओं में कार्बन उत्सर्जन कम करने वाली तकनीकों को अपनाना अनिवार्य होगा। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने क्यूसीएफआई द्वारा प्रकाशित स्मारिका का विमोचन भी किया।
क्यूसीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष अविनाश मिश्रा ने संगठन द्वारा गुणवत्ता सुधार के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों पर प्रकाश डाला। वहीं कार्यकारी निदेशक डी. के. श्रीवास्तव ने अधिवेशन की उपलब्धियों पर अपने विचार व्यक्त किए।
स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंस के निदेशक प्रो. पी. एन. झा ने जापान और चीन के गुणवत्ता प्रबंधन मॉडल का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया। क्यूसीएफआई वाराणसी चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. अशोक राय ने स्वास्थ्य क्षेत्र में गुणवत्ता आधारित प्रबंधन के प्रयासों पर प्रकाश डाला।
अधिवेशन के समापन अवसर पर देशभर से आए लगभग 325 प्रतिनिधियों ने विकसित भारत के निर्माण में गुणवत्ता युक्त कार्यस्थल प्रबंधन को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। प्रतिभागियों ने अपने-अपने संस्थानों में गुणवत्ता सुधार से प्राप्त उपलब्धियों को प्रस्तुतीकरण एवं मॉडलों के माध्यम से प्रदर्शित किया।
कार्यक्रम का संचालन क्यूसीएफआई के निदेशक विजय कृष्ण ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन वाराणसी चैप्टर के सचिव अरुणमय चक्रबर्ती ने दिया। अधिवेशन को सफल बनाने में ए.एच. खान, रवि श्रीवास्तव, वी.के.बी. दास, मनोज कुमार रेड्डी, श्रीमती अरुणा सिंह तथा पी.सी. श्रीवास्तव सहित अनेक पदाधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।